Saturday, February 14, 2026
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Pulwama Attack 14 February : पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवान हुए थे शहीद, इनकी शहादत को सलाम

श्रीनगर। Pulwama Attack 14 February : पुलवामा हमला हुए सात साल हो गए हैं। सात वर्ष पहले 14 फरवरी 2019 को जब दुनियाभर में वैलेंटाइन डे मनाया जा रहा था, श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर विश्व प्रसिद्ध केसर की क्यारियों के पास लेथपोरा पुलवामा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक जोरदार बम धमाके के साथ धुएं का गुब्बार उठा और उसके बाद वहां केसर की खुश्बू नहीं सीआरपीएफ के 40 वीर बलिदानियों के जलते मांस और बारूद की गंध थी।

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उसके बाद से 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के लिए नहीं, बल्कि आतंक के समूल नाश के निर्णायक घोषणा दिवस के रूप में। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के समर्थन से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद द्वारा किए गए इस हमले के बाद जो हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा और समझ लिया।

उड़ी सर्जिकल स्ट्राइक ने जिस नए भारत के निर्माण की कहानी सुनाई थी, वह बालाकोट एयरस्ट्राइक- ऑपरेशन बंदर के साथ बहुत आगे बढ़ चुकी है। लगभग 48 वर्ष बाद पहली बार भारतीय वायुसेना ने किसी शत्रु देश के भीतर हमला कर आतंकी शिविरों को नष्ट किया था।

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पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हुआ, उसने भारतीय राजनीतिक नेतृत्व की आतंकवाद के खात्मे की संकल्पबद्धता को एक नयी ताकत दी और आतंकवाद-अलगाववाद के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध शुरू हुआ और उसका सुखद परिणाम आज सभी देख रहे हैं।

अनुच्छेद 370के वह सभी प्रविधान समाप्त हो गए, जो जम्मू कश्मीर को अलग संविधान देने के साथ ही अलगाववादी तंत्र को प्रोत्साहण दे रहे थे। मौजूदा समय में अब जम्मू कश्मीर में आतंकियों का पारिस्थितिक तंत्र लगभग नष्ट हो चुका है और आतंकी भर्ती अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है।

जम्मू-कश्मीर में भय का माहौल नहीं

हालांकि विगत सात वर्षों के दौरान पहलगाम हमले समेत कई आतंकी हमले हुए हैं, लेकिन उनके आधार पर कोई भी यह नहीं कह सकता कि जम्मू कश्मीर में आज असुरक्षा और भय का माहौल है। इन हमलों केा अपवाद माना जाए, क्याेंकि जम्मू कश्मीर के लोगों के चेहरों पर अब सुरक्षा और विश्वास की भावना को स्पष्ट महसूस किया जा सकता है।

हालांकि, आज भी इस हमले का मुख्य गुनाहगार अजहर मसूद और उसके कई साथी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं,लेकिन अजहर मसूद के भतीजे उमर फारुक और एक अन्य करीबी रिश्तेदार इस्माइल अल्वी समेत घाटी में सक्रिय जैश के सभी प्रमुख कमांडरों को सुरक्षाबलों ने 72 हूरों तक पहुंचा दिया है।

जैश को अब कश्मीर में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए न ओवरग्राउंड वर्कर मिल रहा है और न उसे अपने कैडर के लिए स्थानीय आतंकी। जैश खुद को बचाने के लिए अब छद्म संगठनों का सहारा ले रहा है।

ब्लैक डे नहीं, आतंक के खिलाफ प्रहार

एनआइए के अनुसार, हमला 14 फरवरी 2019 को नहीं बल्कि उससे कुछ दिन पहले ही किया जाना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण सुरक्षाबलों की जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के जरिए आवाजाही बंद थी। जैश ए मोहम्मद ने सिर्फ 14 फरवरी को हमला करने के बाद, पुलवामा को घाटी में ही एक और जगह दोहराने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद उसने इससे तौबा कर ली थी।

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