नई दिल्ली। Nepal general election : नेपाल में लोकतंत्र की परीक्षा का दिन आज आ गया है। हिमालयी राष्ट्र आज प्रतिनिधि सभा के लिए आम चुनाव में मतदान कर रहा है, जो पिछले साल सितंबर में युवाओं के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद पहला आम चुनाव है।
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उस आंदोलन में 77 लोगों की मौत हुई थी और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई।
लगभग 1.9 करोड़ मतदाता (करीब 19 मिलियन) 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए वोट डाल रहे हैं। इनमें से 165 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली से एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में और 110 सीटें समानुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रोपोर्शनल) से पूरे देश को एक निर्वाचन क्षेत्र मानकर चुनी जा रही हैं।
मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा, हालांकि कुछ इलाकों में देर तक मतदान की अनुमति दी जा सकती है ताकि सभी मतदाता हिस्सा ले सकें।
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्भीक होकर वोट डालें। कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने कहा है कि यह नेपाल के लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही लोकतंत्र मजबूत होगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित रहेगी। देशभर में तीन लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि कोई हिंसा या अनियमितता न हो।
यह चुनाव नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, खासकर युवाओं (Gen Z) की भूमिका को देखते हुए, जिन्होंने पिछले साल बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी। 3,400 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1,000 से ज्यादा 40 साल से कम उम्र के हैं।
प्रमुख दावेदारों में पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली, गगन थापा और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उभरे काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह शामिल हैं। युवा मतदाताओं की संख्या काफी है और वे भ्रष्टाचार मुक्त, जवाबदेह और रोजगार-केंद्रित राजनीति की उम्मीद कर रहे हैं।
चुनाव परिणामों की घोषणा FPTP सीटों के लिए मतपेटियां इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर शुरू हो सकती है, जबकि समानुपातिक परिणामों में एक-दो दिन लग सकते हैं। यह चुनाव नेपाल के लोकतंत्र की मजबूती और भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।


