नई दिल्ली। Karnataka New CM : कर्नाटक में बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच सिद्दरमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और उम्मीद है कि डीके शिवकुमार राज्य के नए सीएम होंगे। कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के सामने कई चुनौतियां भी होंगी।
नए प्रशासन के सामने कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक। इनमें नई कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को संतुलित करने से लेकर, वित्तीय दबाव के बीच कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मेकेदातु जलाशय मुद्दे को सुलझाना शामिल है। ये काम शिवकुमार के लिए मुश्किलों भरा रहने वाला है।
कैबिनेट का गठन
औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने से पहले ही शिवकुमार के सामने मंत्रियों की परिषद चुनने की बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के आलाकमान को पार्टी के भीतर प्रभावशाली जाति समूहों, क्षेत्रों और गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ विधायकों से प्रतिस्पर्धी मांगों का सामना करना पड़ेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के वफादार पहले से ही निरंतरता की मांग कर रहे हैं और शिवकुमार का खेमा अधिक प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रहा है। ऐसे में विभागों के बंटवारे की प्रक्रिया पेचीदा हो सकती है।
कई उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने की संभावना ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया है। शिवकुमार को बहुत सावधानी से संतुलन बनाना होगा क्योंकि क्षेत्रीय या जातिगत असंतुलन की जरा सी भी आशंका असंतोष को जन्म दे सकती है।
अहिंदा को एकजुट रखना
शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक अहिंदा के उस समर्थन आधार को बनाए रखना है, जिसे सिद्दरमैया ने बड़ी मेहनत से तैयार किया था। अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के इस सामाजिक गठबंधन ने 2023 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी में अहम भूमिका निभाई थी और यह पार्टी की चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
हालांकि वोक्कालिगा समुदाय में शिवकुमार को जबरदस्त समर्थन हासिल है और पार्टी के संगठन पर भी उनका पूरा नियंत्रण है लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें अहिंदा समुदायों को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनके हितों की रक्षा आगे भी होती रहेगी।
गारंटी बनाम सरकारी खजाना
कांग्रेस की मुख्य गारंटी योजनाओं को जारी रखते हुए राज्य के वित्त का प्रबंधन करना एक मुश्किल भरा काम साबित हो सकता है। सरकार पहले से ही पांच योजनाओं पर सालाना लगभग 51,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसमें गृह लक्ष्मी, शक्ति, अन्न भाग्य, युवा निधि और गृह ज्योति जैसी योजनाएं शामिल हैं।
बेंगलुरु से आगे
बेंगलुरु से बाहर विकास का विस्तार करना और कृषि संबंधी चिंताओं को दूर करना एक और अहम क्षेत्र है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। भले ही बेंगलुरु निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक ध्यान के मामले में हावी बना हुआ है, लेकिन उत्तरी और ग्रामीण कर्नाटक के प्रतिनिधियों ने लगातार इन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की मांग की है।
मेकेदातु और कावेरी विवाद
लंबे समय से अटके मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर प्रोजेक्ट और कावेरी नदी से जुड़े बड़े विवाद के संवेदनशील राजनीतिक चुनौतियों के रूप में सामने आने की उम्मीद है। 2023 के चुनावों से पहले कनकपुरा से बेंगलुरु तक पदयात्रा करके मेकेदातु प्रोजेक्ट की जोरदार वकालत करने वाले शिवकुमार पर सीएम के तौर पर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का भारी दबाव होगा।


