Thursday, October 15, 2026
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Ankita Bhandari murder case: एक बार फिर मुखर हुए तमाम सामाजिक संगठन, सीबीआई कार्यालय में तालाबंदी का ऐलान

देहरादून: Ankita Bhandari murder case उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक दलों ने एक बार फिर से हुंकार भरी है. गुरुवार यानि आज अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले जन सरोकारों से जुड़े संगठन सीबीआई कार्यालय देहरादून में तालाबंदी का ऐलान किया है. संयुक्त संघर्ष मंच से जुड़े लोगों के साथ विपक्षी दलों और जन संगठनों की बैठक हुई, इस बैठक में कांग्रेस पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को कई महीने बीत जाने के बावजूद आज तक जनता के महत्वपूर्ण सवालों का जवाब नहीं मिल पाया है.

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उन्होंने आगे कहा कि मामले में लगातार वीआईपी का जिक्र सामने आया और वह नाम सार्वजनिक चर्चा में भी आए लेकिन अब तक सीबीआई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उस वीआईपी से पूछताछ हुई है या नहीं हुई है. इसके अलावा जिस रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट किया गया उसे मामले में भी कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं दिखाई दे रही है.

उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले जब हम सीबीआई कार्यालय पहुंचे थे, तब अधिकारियों ने आश्वस्त किया था कि जांच की प्रगति और महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी जाएगी. लेकिन आज तक संयुक्त संघर्ष मंच को कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच से जुड़ी कमला पंत ने कहा कि आज इसके विरोध में देहरादून के इंदिरा नगर स्थित सीबीआई कार्यालय में शांतिपूर्ण तालाबंदी कार्यक्रम आयोजित किया गया है और इस कार्यक्रम के जरिये उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से लोग पहुंचेंगे और सीबीआई से यह जवाब मांगेंगे कि आरोपित वीआईपी व्यक्तियों को पूछताछ के दायरे में अब तक क्यों नहीं लिया गया है और अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है.

उन्होंने बताया कि संयुक्त संघर्ष मंच यह भी सवाल उठाने जा रहा है कि अंकिता भंडारी के माता-पिता से अब तक पूछताछ क्यों नहीं की गई है. भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की करीबी उर्मिला सनावर से पूछताछ क्यों नहीं की गई है. इसके अलावा यह भी सवाल प्रमुखता से उठाया जाएगा कि सबूत मिटाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है. संयुक्त संघर्ष मंच का कहना है कि यह आंदोलन पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए किया जा रहा है.

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